नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच 67,867 कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि पहले से नियुक्त 67,867 शिक्षकों को सेवा से नहीं हटाया जाएगा। सरकार ने यह पक्ष भर्ती विवाद से संबंधित सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष रखा है।
सरकार ने पूरी की नई मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुपालन में संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सरकार का कहना है कि नई मेरिट सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के लिए वह तैयार है, लेकिन यह नियुक्तियां तभी की जाएंगी जब रिक्त पद उपलब्ध होंगे और संबंधित अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी करते होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का किया जाएगा पालन
राज्य सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल इसी विशेष मामले तक सीमित रहेगी और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो भी अंतिम निर्देश देगा, उसका पूर्ण पालन किया जाएगा।
आरक्षण और मेरिट सूची को लेकर शुरू हुआ था विवाद
उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती लंबे समय से विवादों में रही है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था और मेरिट सूची को लेकर कई अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। आरोप लगाया गया था कि आरक्षण के नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया, जिससे आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट
भर्ती विवाद पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था। 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद पहले से नियुक्त हजारों शिक्षकों की नौकरी को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। बाद में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां अब मामले की सुनवाई जारी है।
अंतिम फैसले पर टिकी सभी की नजरें
सरकार के ताजा हलफनामे के बाद फिलहाल 67,867 कार्यरत शिक्षकों को राहत मिली है। वहीं संशोधित मेरिट सूची में शामिल नए पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति और भर्ती प्रक्रिया का अंतिम स्वरूप अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
